💔🥀हर एक शख़्स ने “अपना” कह कर किनारा कर लिया,मैं सोचता ही रह गया — ये क्या माजरा कर लिया।जो लोग मेरी ज़ात में शामिल थे साँसों की तरह,वक़्त ने कैसे उन्हें मुझसे जुदा कर लिया।मैंने हर रिश्ते को दिल की तरह सींचा था मगर,सब ने अहसास को जैसे कोई तमाशा कर लिया।अब किसे अपना कहूँ, किसको पराया समझूँ,सब ने चेहरे पे नया एक ही नक़ाब कर लिया।वो जो कहते थे कि मर जाएँगे मेरे बिन भी कभी,आज उन्हीं लोगों ने जीने का हुनर पा कर लिया।अब तो तन्हाई ही “शिवा” मेरी हमराज़ बनी,हर किसी ने मुझे “अपना” कह के तन्हा कर लिया।
